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शिकायतें

एक महिला और उसका छोटा सा बच्चा समुद्र की लहरों पर अठखेलियां कर रहे थे। पानी का बहाव काफी तेज था। अचानक पानी की एक विशाल लहर आई और वह छोटा बच्चा कहीं खो गया। मां ने चिल्लाते हुए पानी में हर तरफ उसे खोजा। जब यह स्पष्ट हो गया कि बच्चा डूब गया है, तब पुत्र के वियोग में व्याकुल मां ने अपनी आंखें आकाश की ओर उठाई और प्रार्थना की, "ओह, दयालु परम पिता, कृपया मुझ पर रहम कीजिए और मेरे बच्चे को वापस कर दीजिए।"

तभी, पानी की एक और लहर आई और उसने अपने छोटे से बेटे को वहां खड़ा पाया। उसने उसे चूमा और अपनी छाती से लगा लिया।

उसने उसे एक क्षण के लिए देखा और एक बार फिर अपनी निगाहें स्वर्ग की ओर उठा दीं। ऊपर की ओर देखते हुए उसने कहा, "लेकिन इसके सिर पर हैट (टोपी) नहीं है। बच्चा वापस आ गया है, लेकिन हैट खो गया है।" अब वह इसलिए अप्रसन्न थी कि हैट खो गया है।

हमारे मन के भीतर भी यही हो रहा है। जीवन हमें जो कुछ भी देता है उसके लिए हम धन्यवाद नहीं देते। हम बार-बार जो नहीं मिला उसके बारे में शिकायत करते रहते हैं। हम लगातार उसी को देखते रहते हैं जो नहीं हुआ, उस पर ध्यान नहीं देते जो हो चुका है। हमारे लिए लाखों बातें घटित हो रही हैं, लेकिन हम कभी आभारी नहीं होते। हम हमेशा शिकायतों से भरे रहते हैं।