जापान का एक सम्राट रात को वेश बदलकर अपनी राजधानी की स्थिति देखने के लिए निकलता था। एक दिन उसने देखा कि एक भिखारी हमेशा एक वृक्ष के नीचे जागता रहता है। सम्राट की उत्सुकता बढ़ गई और उसने भिखारी से पूछा, "तू रातभर जागता क्यों है?"
भिखारी ने उत्तर दिया, "अगर सो जाऊं और कोई चोरी कर ले, तो क्या होगा? मैं वृक्ष के नीचे बैठा हूं, कोई और सुरक्षा नहीं है, तो दिन में सो लेता हूं। दिन में तो सड़क पर लोग होते हैं, रात को मुझे जागना ही पड़ता है।"
सम्राट ने उसके पास पड़े हुए चीथड़ों का ढेर और टूटे-फूटे भिक्षा के पात्र देखे। उसने सोचा कि भिखारी भी चिंतित है कि उसकी मामूली संपत्ति चोरी न हो जाए।
लालच का फैलाव जितना कम हो जाता है, उसकी तीव्रता (intensity) उतनी ही बढ़ जाती है। यह समझने योग्य है। जैसे सूरज की किरणें बिखरी हुई होने पर आग पैदा नहीं करतीं, लेकिन एक लेन्स के माध्यम से इकट्ठा होने पर कागज को जला देती हैं।
आपने कभी गौर किया की ये बात भिखारी तक सीमित नहीं हैं, यह नियम मनुष्य जगत के हर एक जीव पर लागू होता हैं। जो भी व्यक्ति सब कुछ छोड़ कर किसी एक चीज के प्रति केंद्रित हो जाता हैं, उस चीज के प्रति Intensity बढ़ जाती हैं।
साधु अपनी पूरी शक्ति ईश्वर को पाने में लगाता हैं। उसकी पूरी ऊर्जा एक दिशा में प्रवाहित होने लगती हैं और वही शक्ति जब दूसरी दिशा में बहने लग जाती हैं तो उसकी गहनता उसी अनुपात में तीव्र हो जाती हैं। इसीलिए कई बार सिकुड़ा हुआ साधु गृहस्थ से भी ज्यादा गृहस्थ हो जाता है।